एक सच्चे श्रीमान/श्रीमती/व्यक्ति की आत्मा/मन/दिमाग में दया के जाल/रास्ते/सीमाओं से भेद करना मुश्किल होता है। जबकि/यहाँ तक कि/उसके साथ ही वह नियमों/शर्तों/प्रक्रियाओं को तोड़ने वाला नहीं होता, फिर भी उसका मन/आत्मा/दिल दूसरों की दर्द/मुश्किलें/रूचि में उलझ जाता है। यह जाल/रास्ता/परिवेश उसे अपने अंद